फर्जी स्कूलों पर हाई कोर्ट हुआ सख्त: 17 दिसम्बर तक देनी होगी हाई कोर्ट में फर्जी स्कूलों की पहचान कर जांच रिपोर्ट

फर्जी स्कूलों पर हाई कोर्ट हुआ सख्त: 17 दिसम्बर तक देनी होगी हाई कोर्ट में फर्जी स्कूलों की पहचान कर जांच रिपोर्ट

फर्जी स्कूलों पर हाई कोर्ट हुआ सख्त: 17 दिसम्बर तक देनी होगी हाई कोर्ट में फर्जी स्कूलों की पहचान कर जांच रिपोर्ट

  • सरकार की गले की फांस बने फर्जी स्कूलों की पहचान में जुटा शिक्षा विभाग
  • सबसे अधिक 500 फर्जी स्कूल अकेले हिसार में, आरटीआई में हुआ खुलासा

भिवानी, 13 नवम्बर: प्रदेश भर में चल रहे हजारों फर्जी स्कूलों के मामले में माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 12 नवम्बर को सुनवाई के दौरान अपना अपना रुख स्पष्ष्ट करते हुए हरियाणा सरकार को कड़े लहजे में 17 दिसम्बर तक फर्जी स्कूलों की पहचान कर जांच रिपोर्ट सौंपे जाने की बात कही है। न्यायालय द्वारा जल्द से जल्द सरकार से जांच रिपोर्ट तलब किए जाने के आदेशों के बाद प्रदेशभर में फर्जी स्कूल संचालकों में भी तिलमिलाहट बढ़ गई है। सबसे अहम बात तो यह भी है कि सबसे अधिक फर्जी स्कूलों की संख्या हिसार में हैं। हिसार के सभी ब्लॉकों में एक आरटीआई में मांगी गई सूचना में खुलासा हुआ है कि यहां लगभग 500 से अधिक फर्जी स्कूलों का संचालन हो रहा है, इन सभी फर्जी स्कूलों की हाल ही में शिक्षा विभाग द्वारा पहचान कराई गई है। सरकार की गले की फांस बन चुके फर्जी स्कूलों की पहचान भी अब एक माह के अंदर ही पूरी कर जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंपी जाएगी, ऐसे में शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इन स्कूलों की पड़ताल में जुटे हैं।
प्रदेशभर के फर्जी स्कूलों को हाई कोर्ट में चुनौति देने वाले याचिकाकर्ता स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार की तरफ से भी गत 12 सितम्बर को माननीय उच्च न्यायालय में 175 पेज का शपथ पत्र देकर करीबन पांच हजार फर्जी स्कूलों की संख्या बताई गई। जबकि हरियाणा सरकार की तरफ से गत 25 जुलाई को हुई सुनवाई में एक शपथ पत्र देकर प्रदेश भर में गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की संख्या 1087 बताई थी। इस पर याचिकाकर्ता स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने आपत्ति जताते हुए न्यायालय में सरकार द्वारा पेश आंकड़ों को भ्रमित किए जाने वाला करार देते हुए कहा कि अगर जांच कराई जाए तो प्रदेशभर में गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की करीबन पांच हजार पाई जाएगी।
हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय की शरथ में गैर मान्यता स्कूलों के मसले को लेकर पहुंचे स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि 9 सितम्बर 2017 को उनके संगठन ने प्रदेशभर में चल रहे गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जनहित याचिका डाली थी। जिस पर न्यायालय ने लगातार सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए और कड़ी फटकार भी लगाई। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के जो आंकड़े सरकार की तरफ से न्यायालय में पेश किए, वे झूठे एवं भ्रांमक थे, जिन्हें संगठन ने चुनौति दी थी। बृजपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग से मांगी गई एक आरटीआई में यह बात सामने आई है कि हिसार जिला में 500 से अधिक फर्जी स्कूल व प्ले स्कूल चल रहे हैं, जिनकी पहचान भी विभाग द्वारा की जा चुकी है।
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मान्यता रिन्यू कर फीस जमा कराने से होगी सरकार को लगभग 100 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति: बृजपाल परमार
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने बताया कि शिक्षा नियमावली 2003 के नियम 39 में दस वर्ष के बाद निजी स्कूलों को दोबारा मान्यता के लिए मान्यता रिन्यू कराना अनिवार्य होता है, लेकिन आज तक शिक्षा विभाग ने इस दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठाया था। हरियाणा के इतिहास में पहली बार शिक्षा विभाग ने मान्यता रिन्यू के लिए निजी स्कूलों द्वारा फार्म नम्बर 2 फीस व सम्पूर्ण दस्तावेजों सहित शिक्षा निदेशालय को भेजने के आदेश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग के इन आदेशों से हरियाणा सरकार को करीबन 100 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में चल रहे मान्यता प्राप्त निजी स्कूल सालाना करोड़ों रुपयों का लाभ कमा रहे हैं, जबकि सरकार को राजस्व देने में आनाकानी कर रहे हैं। फार्म नम्बर 2 भरने से अधिकांश निजी स्कूल जो गलत तरीके से मान्यता हासिल करके चल रहे हैं, उन पर भी गाज गिरना तय हो जाएगा और बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से भी सरकार का यह निर्णय सही है।

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नवीन शर्मा,रेवाड़ी हरियाणा

बीबीसी लाईव

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