ताजा खबर :

भारत बंद से हिल गई भाजपा-जनता का भी मिला समर्थन

भारत बंद से हिल गई भाजपा-जनता का भी मिला समर्थन

भारत बंद से हिल गई भाजपा-जनता का भी मिला समर्थन

रिपोर्ट-अब्दुल सलाम क़ादरी, छत्तीसगढ़/सगीना महतो,नई दिल्ली बीबीसी लाइव-

भारत बंद’ वाली यह तो सचमुच राहुल गांधी की कांग्रेस है

खुद कांग्रेस को भी याद नहीं है कि उसने पिछला भारत बंद कब किया था? पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला दिमाग पर जोर डालकर कहते हैं कि वाजपेयी जी की सरकार के समय में कांग्रेस ने कोई भारत बंद का आह्वान नहीं किया था। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत का भी मानना है कि भारत बंद कांग्रेस की संस्कृति मेंं नहीं था, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सफल भारत बंद का आह्वान किया। पार्टी के नेता भारत बंद के नतीजे से गदगद हैं। उत्साह में कांग्रेस के नेता इसके नतीजे को अब भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार से विदाई का संकेत मान रहे हैं।

क्यों खुश है कांग्रेस?

अशोक गहलोत की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखाई देती है। रणदीप सुरजेवाला के तर्क में नई जान भारत बंद का उद्देश्य पूरा हो जाने की तरफ ईशारा कर रही है। सुरजेवाला और गहलोत दोनों को मानना है कि भारत बंद को जनता ने सफल करा दिया। जनता ने खूब साथ दिया, लोगों ने खुद अपनी दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखे। कांग्रेस महासचिव के अनुसार दरअसल देश की जनता पिट्रोल, डीजल, रसोई गैस, मिट्टी का तेल के दाम में लगी आग से बेहद गुस्से में है।

उसने भारत बंद के माध्यम से अपनी नाराजगी को दिखाया है। कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि केन्द्र सरकार का इस मुद्दे पर घबड़ाना दिखाई देने लगा। केन्द्र सरकार दो वरिष्ठ मंत्री रवि शंकर प्रसाद और धर्मेंन्द्र प्रधान के बयान को भी वह सरकार की घबराहट के तौर पर ही देख रहे हैं। कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी को लग रहा है कि उसका भारत बंद का निर्णय पूरी तरह से सफल रहा है।

राम लीला मैदान में नहीं बोली सोनिया

भारत बंद के बाद राम लीला मैदान में विपक्षी दलों के नेताओं को बोलना था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कैलाश मानसरोवर यात्रा पर होने के कारण भारत बंद की रणनीति यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के नेतृत्व में तैयार हुई। इसमें गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खडग़े, अहमद पटेल की भूमिका अहम रही। सोनिया गांधी लगातार सक्रिय रहीं। वह राम लीला मैदान तक भी आईं, लेकिन भारत बंद के दौरान समय पर राहुल गांधी के यात्रा पूरी करके के लौटने के बाद उन्होंने खुद को समेटना शुरू कर लिया।

वह थोड़ी ही देर बाद बिना बोले रामलीला मैदान से चली गई। मंच पर भी सोनिया गांधी नेताओं से कोई बहुत संवाद नहीं कर रही थीं। इतना ही नहीं भारत बंद पर पहले एनसीपी के शरद पवार और अंत में राहुल गांधी बोले। यह संदेश देने के लिए क्रम रखा गया था कि 21 दलों के बंद के आह्वान में मंच पर बैठे नेताओं सबसे वरिष्ठ और दूसरे नंबर का ओहदा रखने वाले शरद पवार हैं। इसके बाद बंद का आह्वान करने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी।

अभी और होगा राजनीतिक हल्ला

भारत बंद के बाद विपक्ष सरकार को राहत देने के मूड में नहीं है। केन्द्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर जल्द ही अगला हमला एनसीपी के शरद पवार बोल सकते हैं। शरद पवार इसकी तैयारी कर रहे हैं। इसमें पिट्रोल-डीजल, रसोई गैस के बढ़ते दाम से लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे। इस हमले का मुख्य केन्द्र महाराष्ट्र हो सकता है। इसी तरह से कांग्रेस पार्टी अब समस्या के समाधान तक इस मुद्दे पर राजनीतिक आंदोलन जारी रखने की योजना पर काम कर रही है।

वामदल, तृणमूल कांग्रेस, सपा-बसपा समेत अन्य विपक्ष के सहयोगी दलों ने सरकार के खिलाफ इसे राजनीतिक आंदोलन का रूप देने पर मंत्रणा शुरू कर दी है। इसके साथ-साथ विपक्ष गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकारों द्वारा कुछ कदम उठाने के लिए आम राय बनाने की कोशिश कर रहा है। पंजाब, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल आदि में जनता को फौरी राहत देने के लिए अलग-अलग स्तर पर पहल शुरू की जा रही है।

क्यों नहीं करती थी कांग्रेस भारत बंद

आजादी के बाद देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू बने थे। तब से कांग्रेस को कभी ऐसा अवसर नहीं मिल पाया। सत्तर के दशक में पहली गैर कांग्रेस सरकार केन्द्र में आई, लेकिन इस सरकार की नीतियों से जनता का मोह भंग हो गया। अस्सी के दशक में फिर गैर कांग्रेस की सरकार केन्द्र में आई, लेकिन यह भी कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी। नब्बे के दशक में तीसरी बार गैर कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई। इस सरकार को कांग्रेस का बाहर से समर्थन हासिल था। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने।

वह मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। उनकी सरकार के समय में मंहगाई, पिट्रोल-डीजल के दाम, ताबूत घोटाला जैसे मुद्दे रहे, लेकिन यह कभी इतने बड़े नहीं हो पाए कि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को भारत बंद का आह्वान करने का अवसर मिल पाता। मई 2014 में पूर्ण बहुमत के साथ मोदी सरकार ने केन्द्र में सत्ता संभाली, लेकिन साढ़े चार साल से भी कम समय में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को यह अवसर मिल गया। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि बदली परिस्थिति में पार्टी की न केवल भूमिका बदली है, बल्कि इसकी चुनौतियां और राजनीति के तरीके भी बदल रहे हैं।

बीबीसी लाईव

Related Posts

leave a comment

Create Account



Log In Your Account