धरती पर गिरने वाला है चीन का स्पेस स्टेशन

धरती पर गिरने वाला है चीन का स्पेस स्टेशन

धरती पर गिरने वाला है चीन का स्पेस स्टेशन

अब्दुल सलाम कादरी-(बीबीसी लाईव)

चीन के बंद पड़े स्पेस स्टेशन का मलबा जल्द ही पृथ्वी पर गिर सकता है. यह कहना है उन वैज्ञानिकों का जो इस स्पेस स्टेशन की निगरानी कर रहे हैं.

द तियांगोंग-1 चीन के महत्वकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम का हिस्सा था. इसे चीन के 2022 में अंतरिक्ष में मानव स्टेशन स्थापित करने के लक्ष्य का पहला चरण भी माना जाता है.

इसे साल 2011 में अंतरिक्ष में भेजा गया था और पांच साल बाद इसने अपने मिशन को पूरा कर लिया. इसके बाद यह अनुमान लगाया जा रहा था कि वापस पृथ्वी पर गिर जाएगा.

ये कहां और किस समय गिरेगा, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है, क्योंकि अब यह नियंत्रण से बाहर है.

एक नए अनुमान में यह कहा गया है कि इस बंद पड़े स्पेस स्टेशन का मलबा 30 मार्च से दो अप्रैल के बीच धरती पर गिर सकता है.

अधिकतर स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में जल कर नष्ट हो जाते हैं, लेकिन कुछ मलबे अपनी स्थिति में बने रहते हैं, जिसे पृथ्वी पर गिरने का डर होता है

ये कहां गिरेगा?

चीन ने साल 2016 में इस बात की पुष्टि की थी कि उनका द तियांयोंग-1 से संपर्क टूट गया है और वो इसे नियंत्रित करने में सक्षम नहीं है.

द यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने कहा है कि पृथ्वी पर इसका मलबा भूमध्य रेखा पर 43 डिग्री उत्तर से 43 डिग्री दक्षिण के बीच गिर सकता है.

एजेंसी द तियांगोंग-1 के बारे में लगातार सूचना देते रही है और इस बार यह अनुमान लगाया है कि इसका मलबा पृथ्वी पर 30 मार्च से दो अप्रैल के बीच वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है.

यह कैसे गिरेगा

स्टेशन का मलबा धीरे-धीरे पृथ्वी के नजदीक आ रहा है. द ऑस्ट्रेलियन सेंटर फोर स्पेश इंजीनियरिंग रिसर्च के उप निदेशक डॉ. एलियास अबाउटेनियस ने बीबीसी से कहा, “जैसे ही यह पृथ्वी के 100 किलोमीटर के नजदीक आएगा, यह गर्म होने लगेगा.”

वो आगे कहते हैं कि अधिकतर स्पेश स्टेशन इस तरह जल कर नष्ट हो जाते हैं और “यह कहना मुश्किल है कि स्पेश स्टेशन का कौन सा हिस्सा बचेगा क्योंकि चीन ने इसके स्वरूप के बारे में दुनिया को नहीं बताया है.”

डॉ. एलियाश कहते हैं कि अगर यह आबादी वाले इलाक़े में रात के समय जल कर नष्ट होता है इसे तारे की तरह देखा जा सकेगा.

क्या हमलोगों को चिंतित होने की ज़रूरत है?

बिलकुल नहीं. वातावरण से गुजरते ही 8.5 टन का अधिकांश हिस्सा नष्ट हो जाएगा. हो सकता है कि स्पेस स्टेशन का कुछ हिस्सा, जैसे फ्यूल टैंक या रॉकेट इंजन पूरी तरह नहीं जले.

अगर ये बच भी जाते हैं तो इससे जानमाल की हानि होगी, इसकी आशंका कम है.

द यूरोपियन स्पेश एजेंसी के प्रमुख होलगर क्रैग ने कहा, “मेरा अनुमान यह है कि इससे क्षति की आशंका वैसी ही है जैसे बिजली के गिरने से होता है. बिजली के गिरने से नुक़सान की आशंका बहुत कम ही होती है.”

क्या सभी स्पेस का मलबा पृथ्वी पर गिरता है?

डॉ. एलियाश कहते हैं कि अधिकतर मलबा पृथ्वी की तरफ़ आते हैं और यह समुद्री या आबादी वाले इलाक़ों से दूर जल कर राख हो जाते हैं.

स्पेस स्टेशन और क्राफ्ट से संचार कायम होता है तो इसे मन मुताबिक जगह पर गिराया जा सकता है.

इसे दक्षिण प्रशांत महासागर में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अमरीका के बीच गिराया जाता है. इस 1500 वर्ग किलोमीटर के इलाक़े को स्पेस क्राफ्ट और सैटेलाइट का क़ब्रिस्तान कहते हैं.

द तियांगोंग-1 है क्या?

चीन ने साल 2001 में अंतरिक्ष में जहाज भेजना शुरू किया और परीक्षण के लिए जानवरों को इसमें भेजा. इसके बाद 2003 में चीनी वैज्ञानिक अंतरिक्ष पहुंचे.

सोवियत संघ और अमरीका के बाद चीन ऐसा करने वाला तीसरा देश था.

साल 2011 में द तियांगोंग-1 के साथ चीन का स्पेस स्टेशन कार्यक्रम की शुरुआत हुई. एक छोटा स्पेस स्टेशन वैज्ञानिकों को कुछ दिनों के लिए अंतरिक्ष ले जाने में सक्षम था.

इसके बाद 2012 में चीन की पहली महिला यात्री लियू यांग अंतरिक्ष गईं.

इसने तय समय के दो साल बाद मार्च 2016 में काम करना बंद कर दिया. फिलहाल द तियांगोंग 2 अंतरिक्ष में काम कर रहा है और 2022 तक चीन इसका तीसरा संस्करण अंतरिक्ष में भेजेगा, जिसमें वैज्ञानिक रह सकेंगे.

बीबीसी लाईव

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