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एक न्यूज वेबसाइड और एक लोकल न्यूज़ चेंनल ने छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह के ट्वीट को आधार बनाकर खबर प्रसारित किया है जिसे आप नीचे पढ़ सकते है

एक न्यूज वेबसाइड और एक लोकल न्यूज़ चेंनल ने छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह के ट्वीट को आधार बनाकर खबर प्रसारित किया है जिसे आप नीचे पढ़ सकते है

छत्तीसगढ़-
रायपुर. अपने नरम स्वभाव के लिए प्रख्यात छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह एबीपी न्यूज़ पर जमकर बरसे हैं. उन्होंने अपने ट्वीटर एकाउंट से चैनल एबीपी न्यूज़ पर हमला बोला है. मामला कांकेर की एक महिला चंद्रमणि से जुड़ा है. जिसे लेकर एक ख़बर चैनल ने अपने प्राइम टाइम पर प्रसारित की थी.
डॉक्टर रमन सिंह ने ट्वीट करके पूछा है कि क्या एबीपी न्यूज़ को ये शोभा देता है कि वो कांकेर की महिला को अपने निजी स्वार्थ के लिए हतोत्साहित करे? इस ट्वीट में उन्होंने एबीपी न्यूज़ को नसीहत दी है कि पत्रकारिता का काम के साथ सच को सामने लाना है न कि तथ्यों को तोड़ना-मरोड़ना.
इस पोस्ट के साथ रमन सिंह ने कांकेर की महिला चंद्रमणि का एक नया वीडियो जारी किया है. जिसमें चंद्रमणि बता रही है कि उन्होंने उनकी आय सीताफल का पल्प बनाने से बढ़ी है. जबकि एबीपी न्यूज़ रिपोर्टर ने सवाल सिर्फ खेती को लेकर पूछा था. तो उन्होंने जवाब दिया कि सिर्फ खेती से उनकी आय दोगुनी नहीं हुई है. चंद्रमणि अपने नए वीडियो में बता रही हैं कि उनकी आय खेती के साथ सीताफल पल्प निकालने से दोगुनी हुई है.
मामले ने तूल तब पकड़ा जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एबीपी न्यूज के इस ख़बर को ट्वीट करके पीएम मोदी पर हमला बोला. गौरतलब है कि चैनल ने अपनी रिपोर्ट में दिखाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में कांकेर की जिस महिला चंद्रमणि से खेती में उनकी आय बढ़ने को लेकर चर्चा की थी, दरअसल उसे अधिकारियों ने समझा पढ़ाकर झूठ बोलवाया था. उसकी आय दोगुनी नहीं हुई थी.

मन की बात के बाद एबीपी न्यूज़ संवाददाता ने चंद्रमणि का इंटरव्यूह किया. संवाददाता ने पूछा था कि क्या धान से उनकी आय दोगुनी हुई थी. इसका जवाब महिला ने न में दिया था. इसी के आधार पर चैनल ने रिपोर्ट बना दी कि आय दोगुनी होने की बात जो महिला ने पीएम मोदी से की थी, वो अधिकारियों के प्रभाव में आकर की थी.

गौरतलब है कि चैनल ने सवाल सिर्फ धान को लेकर किया था. न कि सीताफल के पल्प को लेकर. इसी को लेकर रमन सिंह ने चैनल पर निशाना साधा है. ये पहला मौका है जब रमन सिंह इस तरह मीडिया पर सोशल मीडिया के ज़रिए बरसें हैं. वरना उन्हें मीडिया के साथ हमेशा नरमी बरतने वाले नेता के तौर पर जाना जाता है.)

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बात मुद्दे की है लेकिन बीबीसी लाइव का मानना ये है कि पत्रकारिता का काम सवाल पूछना है  तथ्यों को तोड़ा नही गया है एबीपी न्यूज़ चेंनल ने सिर्फ पड़ताल की है जबकि उस महिला को दुबारा डरा कर फिर से उसका बयान की वीडियोग्राफी की गई है, ये हम नही उस गांव के  कुछ लोग नाम ना छापने की शर्त पर बताये की कुछ अधिकारी उस महिला के पास आये थे —–?लेकिन क्यो?

मामला सीताफल के पल्प से जुड़ा है तो जानकर का मानना है कि सीताफल से किया जा रहा व्यवसाय कोई कृषि से जुड़ा नही है ये तो एक लघुउद्योग से सम्बंधित है जो समूह के तौर पर किया जा रहा है लेकिन खासबात ये है कि कृषि से आय का जरिया का उपाय किया जाना चाहिए ना कि गलत आंकड़ो से अपनी वाह वाही लूटना।

सीताफल के पल्प से आइसक्रीम बनाना और उसपर लागत और मुनाफे का आंकड़े पर नजर डाला जाए तो इससे प्राप्त होने वाला समूह की आय तो मनरेगा की मजदूरी से भी आधी है तो आय दुगुनी कैसे हुई।

दुबारा उस महिला के पास आने की क्या जरूरत दुबारा सिर्फ बयान लेना ही जायज है क्या उसके दोगुनी आय उसके बैंक बैलेंस, घर-सभी के आंकड़े पेस करने चाहिये थे?तब माना जाता कि उस महिला की आय दुगुनी हुई है लेकिन सवाल ये है कि मोदी जी ने सवाल खेती की पूछी थी या सीताफल के बारे में पूछा था? महिला ने ये क्यो कहा कि उसकी खेती से आय दुगुनी हुई है उसको उसी समय तो ये बात बतानी थी कि उसकी आय खेती से नही बल्कि सीताफल की वजह से दुगुनी हुई है, सवाल तो बहुत है लेकिन सफाई देने का तरीका भी बहुत है?

महिला दुबारा कितना सत्य बोल रही है ? ये तो उसके पिछले 10 सालों के खेती से हुए आंकड़े बतायेगे की उसकी आय दुगनी हुई या चौगनी, और इस मामले की जांच सिर्फ उसी महिला तक सीमित नही होनी चाहिए अगर उस महिला को खेती या सीताफल से उसकी आय दुगनी हुई है तो उस गांव के लगभग सभी किसानों की आय भी दुगनी होनी चाहिए ये तो जांच का विषय है पर सच्चाई ये है कि डॉक्टर रमन सिंह एबीपी की खबर से बुरा जरूर मान गए है। और उनका साथ कुछ तथा कथित मीडिया भी दे रही है।
मामले को महिला के नाम से फिर से तोड़ मरोड़ कर पेस करवाया गया है जबकि असली हकीकत ये है कि आज भी उस गांव की तस्वीर नही बदली है , वरना इस प्रकार छत्तीसगढ़ में किसानों के द्वारा आंदोलन नही चलाये जाते।
झूठी शान झूठी वाहवाही और लोकल न्यूज़ चैंनलों के बर्ताव ने किसानों के मुद्दों को दबाने का काम किया है । सिर्फ सरकार में अपनी वाह वाही लेने सरकारी विज्ञापन लेने के लिए।
BBC LIVE: अब्दुल सलाम कादरी

 

बीबीसी लाईव

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