भारत-नेपाल सीमा से ग्राउंड रिपोर्ट: सीमा पर धड़ल्ले से चल रहा नशे का अवैध धंधा, हो रही है मानव तस्करी

भारत-नेपाल सीमा से ग्राउंड रिपोर्ट: सीमा पर धड़ल्ले से चल रहा नशे का अवैध धंधा, हो रही है मानव तस्करी

भारत-नेपाल सीमा से ग्राउंड रिपोर्ट: सीमा पर धड़ल्ले से चल रहा नशे का अवैध धंधा, हो रही है मानव तस्करी

भारत-नेपाल के बीच महज दर्जन भर कारोबारी रास्ते हैं, लेकिन हकीकत है कि खुली सीमा पर असंख्य चोर दरवाजे हैं।

नई दिल्ली/पटना. बिहार के हिस्से की भारत-नेपाल की नियंत्रण रेखा (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर किसका नियंत्रण है? सशस्त्र सीमा बल का, नेपाल की आर्म्ड पुलिस फोर्स का, कस्टम का, आईबी का, सीमावर्ती जिलों की पुलिस का या फिर इनमें से किसी का नहीं ! जवाब साफ है-नियंत्रण रेखा पर पूर्ण नियंत्रण इनमें से किसी का नहीं है। वैधानिक रूप से पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से किशनगंज के गलगलिया तक भारत-नेपाल के बीच महज दर्जन भर कारोबारी रास्ते हैं, लेकिन हकीकत है कि खुली सीमा पर असंख्य चोर दरवाजे हैं। दो सौ से अधिक तो नदी नाले हैं। नेपाल में इन्हें खोला कहते हैं। मित्र राष्ट्रों की जनता की बेरोकटोक आवाजाही की आड़ में इन रास्तों का फायदा असामाजिक तत्व उठा रहे हैं। बड़ा सवाल है कि नेपाल के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। खुली सरहद का खतरा तो हम झेल रहे हैं।

बॉर्डर पर फल-फूल रहा है नशे का धंधा

–  बॉर्डर पर तस्करी, धंधे का रूप धर चुका है। एसएसबी के ट्रैप से भी यह साबित है कि नशीले पदार्थों, मवेशियों, हथियारों के ट्रेड और मानव तस्करी के लिए यह खुली सीमा किस हद तक खतरनाक बन चुकी है। तस्करी की सूची में बिहार में शराबबंदी के बाद शराब और पखवारे भर से डीजल-पेट्रोल नये आइटम हैं।

– अपराधियों की तो यह पनाहगाह ही बन चुकी है। बॉर्डर गार्डिंग फोर्स के पास राइफल, दूरबीन और नाइट विजन डिवाइस के अलावा कुछ भी नहीं है। मोटर साइकिल की कौन कहे, साइकिल तक नहीं। बॉर्डर पर मेटल डिटेक्टर, हैण्ड हेल्ड इक्विपमेंट तो हैं ही नहीं।

– बातचीत में एसएसबी के अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि मौजूदा हालात में सीमा को फूल-प्रूफ बनाना नामुमकिन है। बॉर्डर में अनगिनत छेद है। कितने को पाटेंगे। कितने मेटल डिटेक्टर लगाएंगे। फेंसिंग तो है नहीं। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। बॉर्डर के असंख्य लोगों के पास दोहरी नागरिकता है। लोगों की खेती दोनों ओर है। नेपाल और बिहार में बॉर्डर पर बसे गांवों के नाम एक हैं मसलन- बलरामपुर, इनरवा, मुसहरवा, सिरिसिया, कुतुबगंज, आमबाड़ी, सोनापुर आदि। इंटेलिजेंस इनपुट ही सूचना का एकमात्र जरिया है।

 

चेकिंग के नाम पर सिर्फ झोले देखते हैं जवान

– किशनगंज का गलगलिया, बिहार-नेपाल सीमा का अंतिम छोर है। घोषित ट्रांजिट रूट भी। उत्तर-पूर्व दार्जिलिंग जिला और उत्तर में नेपाल का भद्रपुर बाजार। मेची नदी सिमाना है। नदी का चचरी पुल आवाजाही का रास्ता है। पुल के मुहाने पर ही बाॅर्डर पिलर 101 है। यहीं से पड़ताल शुरू हुई।

– एसएसबी की 41वीं बटालियन का भातगांव बॉर्डर आउटपोस्ट की निगरानी में यह इलाका है। चेकिंग के नाम पर जवान बस झोले देखते हैं, कार-बाइक की डिक्की चेक करते हैं। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए गलगलिया ही भद्रपुर के लोगों का बाजार है। इस इलाके में कपड़े और सुपाड़ी की तस्करी आम है। तमाम चौकसी के बावजूद नदी के रास्ते गांठ पार हो जाती है।

– मेची नदी की पेटी में रामवृक्ष महतो की नाश्ते की दुकान है नेपाल में। कहते हैं, बॉर्डर सरकार के लिए है। हमारा तो रोटी-बेटी का रिश्ता है। भद्रपुर में शराब की बोतलें सजी थीं। कीचक के रास्ते में देवनिया खोला (नदी) के किनारे में मवेशी बंधे थे। बताया गया, उचित समय देख सभी किशनगंज प्रवेश कर जाएंगे। वहां इनकी पर्ची बनेगी। अवैध, वैध हो जाएगा। वहां से मवेशी पश्चिम बंगाल के ग्वालपोखर स्थित नदी के रास्ते बांग्लादेश पहुंचा दिए जायेंगे।

बॉर्डर पर चल रहा है बट्‌टा बाजार, 80 सेंटर सिर्फ रक्सौल में
– रक्सौल कस्टम कार्यालय के सामने से रेलवे गुमटी के उस पार तक सड़क किनारे खुले में मनी एक्सचेंज की स्टॉल कतार में है। स्टॉल पर 500, 200, 100, 50,10 रु. के नए-नए नोट की गड्डी सजाकर रखी गई है। हमें नेपाल से लौटा भारतीय समझ, मनी एक्सचेंजर ने नोट बदलने के लिए अपने पास बुलाया। कैमरे का फ्लैश चमका तो सब स्टॉल बंद करने लगे। पता चला कि सभी अवैध तरीके से यहां मनी एक्सचेंज का काम करते हैं।

– 100 रु. में चार रु. कमीशन लेते हैं। नियमत: नेपाल के वीरगंज में स्थित नेपाल राष्ट्र बैंक में ही नोट बदले जाते हैं। पर, वहां 5000 से अधिक इंडियन करंसी नहीं दी जाती है। मनी एक्सचेंज की स्टॉल पर ऐसी कोई लिमिट नहीं है।

– नेपाल राष्ट्र बैंक में 160 रु. का नेपाली नोट देने पर 100 रु. का भारतीय नोट मिलता है। जबकि, रक्सौल में अवैध तरीके से खुले मनी एक्सचेंज सेंटरों पर 164 रु. नेपाली नोट देने पर 100 रु. का भारतीय नोट दिया जाता है। यहां 80 सेंटर इस धंधे में शामिल हैं।

मानव तस्करी का नया रूट, इस साल ही 23 मामले

– खुटौना प्रखंड की पंचायत लौकहा भारत-नेपाल सीमा से बिल्कुल सटी हुई है। अधिकृत रास्ते से यहां भारत से सेब, अंगूर और धान जाता है। थोड़ी ही दूरी पर बलान नदी है। अभी सूखी हुई है। यह नेपाल और भारत के बीच मानव तस्करी का नया रूट है।

– हफ्ते भर पहले नेपाल से भारत लाई गई छह लड़कियों को एसएसबी ने नदी क्षेत्र में पकड़ा है। लौकहा से छह महीने पहले दिल्ली के लिए बस सेवा शुरू होने के बाद यहां तस्करी बढ़ी है। इन दिनों नेपाल से ज्यादा मानव तस्करी बॉर्डर इलाके के भारतीय गांवों से देश के ही अन्य शहरों की ओर हो रही है।

– इसे रोकने के लिए एसएसबी ने सोनबरसा, पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी और जोगबनी में जागृति बस की शुरुआत की है। मकसद, लोगों को जागरूक करना है। 2018 में यहां ह्यूमन ट्रैफिकिंग के 23 मामले सामने आए हैं।

मुचलके पर छूट जाते हैं पशु तस्कर

– गलगलिया से सुखानी तक पता नहीं चलता हम नेपाल में हैं या भारत में। पूरे बॉर्डर पर कई लोग दोनों देश के नागरिक हैं। मवेशियों की तस्करी आम है। जवानों को गोरू पर गोली चलाने की मनाही है। बच्चे मवेशी को बॉर्डर पार कराते हैं। पकड़े जाने पर बस मुचलके पर छूट जाते हैं।

– लाई लोखर मवेशियों की स्मगलिंग के लिए बदनाम है। यहां जवानों और गांव वालों के बीच कई झड़प हो चुकी है। एक बार तो गांव वालों ने जवानों को ढकेलते हुए नेपाल पहुंचा दिया। जवान जान छुड़ाकर भागे। हथियार समेत बॉर्डर पार करने पर मनाही ही नहीं सख्त सजा भी है।

एसएसबी के आने से सुरक्षित हैं हम

– नेपाल वाले कुतुबगंज की बिजली से भारत के कुतुबपुर में बत्ती जलती है। आगे सोनापुर है। आधे किलोमीटर में आबादी बसी है। नेयाज अहमद कहते हैं एसएसबी के आने से सुकून है। चोरी रुकी है। बेटी-बहन सुरक्षित है। वैसे, कितना भी कर लीजिए तीन-पांच करने वाले तो हैं ही।

– सिकटी में मुखिया वजुद्दीन ने पूछने पर कहा कि नेपाल से लोग सुपाड़ी लाते हैं … ज्यादा नहीं किलो-दो किलो। सुपौल जिले के वीरपुर का बॉर्डर इलाका अपेक्षाकृत शांत है। शांत इसलिए कि बॉर्डर कोसी नदी के क्षेत्र में है। यहां भी मवेशियों की और शराब तस्करी आम है।

DB NEWS

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