देश में पहली बार लहसुन बेल व करंज पर साइंटिफिक रिसर्च, बनाई ऐसी दवा

देश में पहली बार लहसुन बेल व करंज पर साइंटिफिक रिसर्च, बनाई ऐसी दवा

देश में पहली बार लहसुन बेल व करंज पर साइंटिफिक रिसर्च, बनाई ऐसी दवा

रायपुर। श्रीनारायण प्रसाद अवस्थी शासकीय आयुर्वेद कॉलेज रायपुर के दो पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) छात्रों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इन्होंने स्थानीय पौधों से चर्म रोग, दर्द और खुजली की दवा तैयार की है, जो सौ फीसद कारगर है।

एक पर एनियल ट्रायल और दूसरे पर ह्मूमन ट्रायल किया जा रहा है, जिनके परिणाम बेहतर है। अब तक कोई भी साइड-इफैक्ट सामने नहीं आया है। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि वे राज्य शासन के अधीन शोध करते हैं, अगर शासन चाहे तो इन्हें पेटेंट भी करवा सकता है।

देश में पहली बार ‘लहसुन बेल’ और करंज को शोध के लिए चुना गया। ‘लहसुन बेल’ पूरी तरह से लहसुन की तरह इस्तेमाल में लाई जा सकती है, लेकिन यह लहसुन से बहुत ज्यादा फायदेमंद है। यह धमनियों में जमे खून को पतला करती है।

‘करंज’ हर तरह का चर्मरोग खत्म कर सकता है। यह शोध इसलिए भी करवाया गया, क्योंकि आज ये बीमारियां तेजी से फैल रही हैं और एलोपैथी में इलाज महंगा है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जीएस बघेल, विभागाध्यक्ष डॉ. आरपी गुप्ता का कहना है कि ऐसे शोध हमें पहचान देते हैं, मरीजों का विश्वास और रुझान दोनों बढ़ता है।

रिसर्च-एक

शोधकर्ता- डॉ. ज्योति मरकाम, पीजी छात्रा, द्रव्य गुण विभाग

किस पर शोध- लहसुन बेल, वैज्ञानिक नाम- मनसोआ अमिसिया

परिणाम- यह दवा चर्मरोग के लिए कारगर है, सूजन खत्म कर देती है, दर्द निवारक भी है।

जानें शोध के बारे में

डॉ. ज्योति मरकाम ने वर्ष 2016 में ‘लहसुन बेल’ पर शोध शुरू किया था। इस शोध के विषय की कहानी रोचक है। विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजेश सिंह को यह पौधा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में दिखाई दिया। वे देखते ही इसका महत्व समझ गए और फिर हर्बल गार्डन में इसे रोपित किया।

डॉ. मरकाम को यह सब्जेक्ट ऑलट हुआ। ढाई साल की मेहनत के बाद एनिमल ट्रायल सफल रहा है। खास बात यह है कि ‘लहसुन बेल’ का पौधा ब्राजील, बुलगारिया, पेरू, इंग्लैंड से लेकर अफ्रीका तक में मिलता है।

अमेजन के किनारे बसे आदिवासी इसका इस्तेमाल कैंसर तक के लिए करते हैं, लेकिन आज तक इस पर कोई काम नहीं हुआ। इस सफलता के बाद आयुर्वेद कॉलेज के डॉक्टर इसे कॉलेज की एथिकल कमेटी में रखेंगे, वहां से ह्मुमन ट्रायल की अनुमति मांगी जाएगी।

रिसर्च- दो

शोधकर्ता- डॉ. अमित गुप्ता, पीजी छात्र, द्रव्य गुण विभाग

किस पर शोध- करंज

परिणाम- यह दवा चर्म रोग, बुखार, खुजली में कारगर साबित हुई है। ह्मूमन ट्रायल जारी है।

जानें शोध के बारे में

‘करंज’ छत्तीसगढ़ में बड़ी मात्रा में मिलता है और आयुर्वेद के इतिहास में इसका नाम पांच हजार पहले से दर्ज है। विभाग के प्रोफेसर्स कहते हैं कि जिन पौधों, वनस्पतियों की उल्लेख अगर शास्त्रों में होता है उसका एनिमल ट्रायल नहीं किया जाता, वह सीधे ह्युमन ट्रायल में ले लिया जाता है।

आयुर्वेद कॉलेज के 60 मरीजों पर इसका ट्रायल जारी है, इसके बेहतर परिणाम हैं। चर्म रोग, खुजली पूरी तरह से खत्म हो जा रही है। यह शोध भी बीते ढाई साल से जारी है।

आयुर्वेद कॉलेज का खुद का हर्बल गार्डन

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आयुर्वेद कॉलेज के पीछे हर्बल गार्डन विकसित करवाया है। सीएम खुद यहीं से पढ़े हैं, इसलिए उनका इस कॉलेज के प्रति खासा लगाव है। आज यह गार्डन हरा-भरा और औषधि पौधों से भरा पड़ा है। यहां के पौधे पर शोध होते हैं। आप अगर इस गार्डन में आएं तो हर पौधे का महत्व बाकायदा आपको समझाया जाएगा। पत्तियां हाथ में लेकर आप सुखद अहसास करेंगे। यह वन विभाग के अधीन है।

आयुर्वेद की तरफ बढ़ा रुझान

मेरा ऐसा मानना है कि आज बड़ी संख्या में मरीज आयुर्वेद की तरफ रूख कर रहे हैं, इसकी वजह है 100 फीसद परिणाम। दो छात्र जो शोध कर रहे हैं, उनके परिणाम सच में सरप्राइजिंग हैं। हर पौधे में कुछ खास तो होता ही है, बर्शते हम उसे पहचानें। – डॉ. राजेश सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, शासकीय नारायण प्रसाद अवस्थी, आयुर्वेद कॉलेज रायपुर

बीबीसी लाईव

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